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पुलिस की दबिश में मासूम की मौत, CPI(M) ने की सख्त कार्रवाई की मांग

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अलवर, 4 मार्च 2025 । अलवर जिले के नौगांव थाना क्षेत्र के गांव तेलियाबास कॉलोनी (रघुनाथगढ़) में पुलिस की दबिश के दौरान एक माह की मासूम बच्ची अलशीबा की मौत का मामला सामने आया है। मृतका के पिता इमरान ने पुलिस पर हत्या का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई है। इमरान के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने पलंग पर सोई बच्ची के सिर पर पैर रख दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद बच्ची के मुंह और कान पर काले निशान बन गए तथा नाक व मुंह से खून निकल आया। इस घटना को लेकर क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है। घटना की जानकारी मिलते ही भारत की कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी का प्रतिनिधि मंडल घटनास्थल पर पहुंचा और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। प्रतिनिधि मंडल में पार्टी की पोलित ब्यूरो सदस्य बृंदा करात, राजस्थान राज्य सचिव किशन पारीक, राज्य सचिव मंडल सदस्य सुमित्रा चोपड़ा, अलवर जिला सचिव रईसा, रामगढ़ तहसील सचिव मुख्यारसिंह, गोविंदगढ़ तहसील सचिव जाकिर और जिला समिति सदस्य इमरान शामिल थे। उन्होंने मृतका के पिता इमरान और मां राजिदा से घटनाक्रम की जानकारी ली और उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। ...

मेवात में शिक्षा का संकट और सोशल मीडिया का बढ़ता दुरुपयोग, युवाओं का भविष्य दांव पर

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अलवर। आधुनिक युग में सोशल मीडिया जहां एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है, वहीं मेवात क्षेत्र  में इसका अनियंत्रित और दिशाहीन उपयोग चिंता का विषय बनता जा रहा है। शिक्षा की कमी के कारण यहां के युवा तेजी से फेसबुक, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की ओर आकर्षित हो रहे हैं। वे बिना किसी ठोस उद्देश्य और तकनीकी जानकारी के चैनल बना रहे हैं और ऐसे वीडियो या पोस्ट साझा कर रहे हैं जो न तो शिक्षाप्रद हैं और न ही समाज के लिए उपयोगी। यह प्रवृत्ति समाज, बच्चों और शिक्षा प्रणाली पर गंभीर प्रभाव डाल रही है। मेवात पहले से ही शिक्षा के मामले में पिछड़ा हुआ जिला माना जाता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यहां का साक्षरता दर अन्य जिलों की तुलना में काफी कम है। ऐसे में, जब युवा अपना समय पढ़ाई के बजाय सोशल मीडिया पर व्यर्थ वीडियो बनाने में लगाते हैं, तो उनकी शैक्षणिक प्रगति रुक जाती है। सोशल मीडिया की लत और भविष्य पर खतरा डिजिटल युग में सोशल मीडिया हर किसी को अभिव्यक्ति का मंच दे रहा है, लेकिन जब यह ज्ञान और शिक्षा के बजाय केवल जल्दी प्रसिद्धि पाने के साधन में बदल जाए, तो यह युवाओं के भविष्य के...
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टपुकडा के स्वास्थ केंद्र मे घूमती रही बकरी लेकिन किसी डॉक्टर या स्टाफ ने उसे भगाने की जहमत नहीं उठाई भिवाड़ी के टपूकड़ा स्वास्थ केंद्र में डॉक्टरों की कमी अब बकरी पूरी कर रही गई। दरअसल भिवाड़ी और टपूकड़ा में डॉक्टरों की कमी तो लगातार मरीजों को खलती है और जो डॉक्टर है वो भी अपने में मस्त रहते हैं। उन्हीं की अनदेखी के चलते शनिवार को टपूकड़ा के स्वास्थ केंद्र में बकरी घूमती रही लेकिन किसी डॉक्टर या नर्सिंग स्टाफ ने उस बकरी को भगाने की जहमत नहीं उठाई। पत्रकार के टोकने पर उस बकरी को वहां से भगाया गया। जब वहां के डॉक्टरों से इस बाबत बात की गई तो उसने पल्ला झाड़ते हुए कहा की हर रोज अस्पताल में भीड़ रहती है। आज भीड़ कम होने की वजह से बकरी अंदर आ गई। साल में अगर एक बार कोई जानवर अंदर आ जाए तो बड़ी बात नही है। -